Gopal Gupta

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हिना (मेंहदी)

दुआ-ओं में जो ढली हिना है 

तो दस्त-ए-रुख़ सजी हिना है,,

 सदा निखारा है हुस्न जिस ने
 वो संग पर ही घिसी हिना है,,

कहे किसी से न हाल दिल का,
क़दम क़दम पर लुटी हिना है,,

खिले हथेली पे रंग-ए- उल्फ़त,
इसी लिए तो मिटी हिना है,,

हमारी साँसे महक रही हैं,
वफ़ा कि खुश्बू बनी हिना है,,

Gopal Gupta "Gopal "

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4 Comments

बहुत खूब

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Abhinav ji

14-Mar-2023 08:13 AM

Very nice 👌

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Gunjan Kamal

14-Mar-2023 01:38 AM

सुंदर प्रस्तुति

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