हिना (मेंहदी)
दुआ-ओं में जो ढली हिना है
तो दस्त-ए-रुख़ सजी हिना है,,
सदा निखारा है हुस्न जिस ने
वो संग पर ही घिसी हिना है,,
कहे किसी से न हाल दिल का,
क़दम क़दम पर लुटी हिना है,,
खिले हथेली पे रंग-ए- उल्फ़त,
इसी लिए तो मिटी हिना है,,
हमारी साँसे महक रही हैं,
वफ़ा कि खुश्बू बनी हिना है,,
Gopal Gupta "Gopal "
डॉ. रामबली मिश्र
14-Mar-2023 09:44 AM
बहुत खूब
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Abhinav ji
14-Mar-2023 08:13 AM
Very nice 👌
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Gunjan Kamal
14-Mar-2023 01:38 AM
सुंदर प्रस्तुति
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